बुधवार, 4 फ़रवरी 2009

ग्लोबल वार्मिंग

संबंधों के बीच से /गरमी उड़ गई /उड़कर हवाओं में घुल गई /अब सुन रहे हैं वातावरण की /हो रही है ग्लोबल वार्मिंग /जिसके लिए दुनिया के ठेकेदार /कर रहे हैं मीटिंग /दुनिया को गर्म होने से कैसे बचाएं /सब के मन में यही सवाल है /पर उस ओर नहीं किसी का ध्यान है /कि जहाँ संबंधों में गर्माहट /जितनी कम है /वहाँ की हवा उतनी ही गर्म है /और चूँकि हवाओं के लिए /कोई सीमा नहीं / वे चल देती हैं उस ओर /जहाँ की हवा अभी ठंडी है / और संबंधों में गर्मी है /धीरे -धीरे ऐसे ही /धरती गर्म होती जायेगी /और... ... /उत्तरी ध्रुव पर पिघलने वाली बर्फ /संबंधों के बीच जम जायेगी ।

1 टिप्पणी:

  1. सचमुच आपने सही कहा है. सम्मलेन करने या केवल बातें बनने से कुछ हासिल नही होने वाला है. यदि सचमुच ग्लोबल वार्मिंग से निपटना है तो दृढ इच्छाशक्ति के साथ ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने ही होंगे.... उत्तम... बधाई.....

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