शुक्रवार, 28 अगस्त 2026

सीढ़ी और नींव

मैं चल रही थी
अपनी राह
पथरीला रास्ता
ऊपर धूप
पाँव में छाले
कुछ लोग दिखे
एक आस जगी

लोग आए
दूर-दूर से आए
धुँधलके और उजाले से आए
मैंने उन्हें दिखाई मंज़िल
बहुत दूर
खड़ी चढ़ाई
सीधी ऊँचाई पर मंज़िल

लोग ठिठके 
नहीं हिचके
पाँव मेरे हाथों पर रखे
फिर कंधे पर
उचककर चढ़ गए

वे मंज़िल पर हैं
ऊँचाई पर
मैं चल रही हूँ

एक भरम है

कि उनकी ऊँचाई
मेरे नीचे होने से ज़्यादा ऊँची नहीं
वे भले मुझे सीढ़ी बना गए
नींव तो मैं ही हूँ
ज़मीन पर
ज़मीन में
ज़मीन से जुड़ी

बुधवार, 26 अगस्त 2026

मार्च की बारिश

झरते हुए पत्ते दरअस्ल 
रोते हुए पेड़ों के आँसू हैं 
बदलते हुए मौसमों की बेरुखी पर  
रो पड़े हैं सारे पेड़।  

(रात की बारिश से उपजे कुछ शब्द 
या यूँ कहें कि दिल की गीली मिट्टी में 
उग आये कुछ शब्द )

प्यार, मोह और असमंजस


मैं प्यार करती हूँ तुमसे
जब छोड़कर जाना चाहोगे, जाने दूँगी, 
पर प्यार करती रहूँगी
किसी और को चाहूँगी, तब भी चाहूँगी तुम्हें,
तुम्हारे बगैर भी जिऊंगी, तुम्हें याद करते हुए। 

पर तुम्हें...मुझसे मोह है,
इसलिए तुम मुझे कभी छोड़ न पाओगे,
तुम जुड़े रहोगे मेरे साथ यूँ ही 
जब हमारे बीच प्यार नहीं रह जाएगा तब भी,
और मैं न रहूँ..., तो जाने क्या होगा?

कभी सोचती हूँ मेरा प्यार बेहतर है 
कभी मन कहता है तुम्हारा मोह भला।

गुरुवार, 20 अगस्त 2026

पल भर का साथ

कभी उस साथी को हमसफ़र मत समझना जिसका घोंसला कहीं और हो 

____ ____ ____ ____ ____ 

दूर देश दाने की तलाश में 
भटक रहा
थका हारा पक्षी
 
सुस्ता लेता है
 
किसी पेड़ की डाल पर यदि छाँव देख
तो वह पेड़
, उस पक्षी का घर नहीं हो जाता

पक्षी जाएगा वहीं पर 
कई दिनों की मेहनत से बनाए हुए घोंसले में जहाँ
भूख से राह देख रहे कुछ नन्हे चूज़े
 
चोंच फैलाए बैठे हैं घण्टों से

पेड़ का गुमान तोड़ने को बस इतनी ही बात काफ़ी है कि वह खुद उड़कर 
जा नहीं सकता
उस पक्षी के पीछे  
जिसके एक पल ठहर जाने को वह
जीवन भर का साथ समझ बैठा था।
 

-मुक्ति

 

शनिवार, 8 अप्रैल 2023

कवयित्री बीनू की कविता गुमनाम प्रेमिकाएँ

कवयित्री बीनू की कविता "गुमनाम प्रेमिकाएँ" हाल ही में इसी नाम से प्रकाशित उनके पहले "कविता-संग्रह" की प्रतिनिधि कविता है। इस कविता में वे उन प्रेमिकाओं की स्थिति की छानबीन करती हैं, जिनका प्रेम प्रकाशित नहीं होता, जो डूबकर प्रेम करती हैं, लेकिन उनके प्रेम के विषय में कोई नहीं जान पाता। उनका नाम प्रेमिकाओं की सूची में शामिल नहीं होता।  

 बीनू की कविताएँ एक अलग ही धरातल पर लिखी गयी हैं. उनमें भाव और प्रवाह के साथ ही साथ गहन अनुभूतियों का विस्तृत संसार है. ये रोमांटिक कविताएँ हैं भी और नहीं भी. भावनाओं से ओतप्रोत होते हुए भी ये कविताएँ ठोस वैचारिक समझ लिए हुए हैं. उन्हें महसूस करने के साथ ही साथ समझना भी ज़रूरी है. इसके लिए बार-बार पाठ करने की ज़रूरत है. सुधी पाठकों को यह कविता-संग्रह अवश्य ही बहुत पसंद आएगा.

इस पोस्ट में उनकी कविता का एक अंश प्रस्तुत कर रही हूँ। उनकी कविताएँ पढ़ने के लिए आप अमेज़न से कविता-संग्रह खरीद सकते हैं इसके लिए यहाँ क्लिक करें।

 

gumnaam-premikayen-beenu


गुमनाम प्रेमिकाएँ 

कहाँ ढूंढ़ी जानी चाहिए?

महाद्वीपों के किस किनारे पर 

पूर्वी या पश्चिमी?

अलग अलग है दोनों 

एक किनारे हैं गर्म हवाएँ 

तो दूसरी ओर ठंडी 

एक तरफ है ज्वालामुखी 

तो दूसरी तरफ बर्फ के पहाड़ 

किन जंगलों, पहाड़ों, तराई 

घाटी, खाई में? 

कहाँ?


गुम हुई प्रेमिकाएँ 

कहीं नहीं छोड़ती कोई चिह्न  

ना किताबों के वर्क पर 

न हाशिए पर 

न शब्दों में, 

न पंक्तियों के बीच 

ख़ाली जगहों में।  


किसी ने नहीं देखी इनकी सूरत, 

न सीरत, 

किसी ने नहीं सुना 

इनका रोना कैसे संभव हुआ ये 

जबकि दूसरी पृथ्वी नहीं है 

जहाँ बस जाने का अंदेशा हो 

वो अपने साथ 

क्या-क्या लेकर विलुप्त हो  

किसके महापाप! 

किसका महापुरुषत्व!



बुधवार, 22 मार्च 2023

इतनी नफ़रत कहाँ से लाते हो?

लाशों का करते हो हिसाब-किताब
हत्यारों की जाति-धर्म गिनाते हो
ये बताओ दोस्त,
इतनी नफ़रत कहाँ से लाते हो... 

अपने धर्म वालों के सौ खून माफ़
दूसरे धर्म को हिंसक बताते हो
ये बताओ दोस्त, 
ऐसा कर कैसे पाते हो?

एक ज़रा सी अफवाह सुनकर 
करते हो हत्याएँ सरेआम 
ऐसा करके दोस्त, 

सोमवार, 18 मार्च 2019

फरवरी की बारिश

भयभीत करता है फरवरी के महीने में
टीन की छतों पर गिरता बारिश का पानी
बढ़ती जाती है जैसे-जैसे ठंडक
सिहरन होती है शरीर में
कान के पीछे झुरझुरी
थरथराते  हाथों से हटता है परदा
भीग गए होंगे बिस्तर फुटपाथ पर सोने वालों के
मेरी आँखों के कोनों पर
अटक जाती हैं दो बूँदें
----
सुना है मंगल ग्रह पर हुआ करता था पानी और जीवन. पानी खत्म हुआ तो जीवन भी खत्म.
रोना कमजोरी की निशानी नही, जीवन का संकेत है