feminist poems
एक स्त्री के मन से निकले कुछ शब्द, कुछ प्रश्न और तमाम अटपटी-अनकही-अनसुलझी बातें...
शुक्रवार, 28 अगस्त 2026
सीढ़ी और नींव
बुधवार, 26 अगस्त 2026
मार्च की बारिश
प्यार, मोह और असमंजस
गुरुवार, 20 अगस्त 2026
पल भर का साथ
कभी उस साथी को हमसफ़र
मत समझना जिसका घोंसला कहीं और हो
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दूर देश दाने की तलाश
में
भटक रहा
थका हारा पक्षी
सुस्ता लेता है
किसी पेड़ की डाल पर यदि छाँव देख
तो वह पेड़, उस पक्षी का घर नहीं हो जाता
पक्षी जाएगा वहीं पर
कई दिनों की मेहनत से बनाए हुए घोंसले में जहाँ
भूख से राह देख रहे कुछ नन्हे चूज़े
चोंच फैलाए बैठे हैं घण्टों से
पेड़ का गुमान तोड़ने
को बस इतनी ही बात काफ़ी है कि वह खुद उड़कर
जा नहीं सकता उस पक्षी के पीछे
जिसके एक पल ठहर जाने को वह
जीवन भर का साथ समझ बैठा था।
-मुक्ति
शनिवार, 8 अप्रैल 2023
कवयित्री बीनू की कविता गुमनाम प्रेमिकाएँ
कवयित्री बीनू की कविता "गुमनाम प्रेमिकाएँ" हाल ही में इसी नाम से प्रकाशित उनके पहले "कविता-संग्रह" की प्रतिनिधि कविता है। इस कविता में वे उन प्रेमिकाओं की स्थिति की छानबीन करती हैं, जिनका प्रेम प्रकाशित नहीं होता, जो डूबकर प्रेम करती हैं, लेकिन उनके प्रेम के विषय में कोई नहीं जान पाता। उनका नाम प्रेमिकाओं की सूची में शामिल नहीं होता।
बीनू की कविताएँ एक अलग ही धरातल पर लिखी गयी हैं. उनमें भाव और प्रवाह के साथ ही साथ गहन अनुभूतियों का विस्तृत संसार है. ये रोमांटिक कविताएँ हैं भी और नहीं भी. भावनाओं से ओतप्रोत होते हुए भी ये कविताएँ ठोस वैचारिक समझ लिए हुए हैं. उन्हें महसूस करने के साथ ही साथ समझना भी ज़रूरी है. इसके लिए बार-बार पाठ करने की ज़रूरत है. सुधी पाठकों को यह कविता-संग्रह अवश्य ही बहुत पसंद आएगा.
इस पोस्ट में उनकी कविता का एक अंश प्रस्तुत कर रही हूँ। उनकी कविताएँ पढ़ने के लिए आप अमेज़न से कविता-संग्रह खरीद सकते हैं इसके लिए यहाँ क्लिक करें।
गुमनाम प्रेमिकाएँ
कहाँ ढूंढ़ी जानी चाहिए?
महाद्वीपों के किस किनारे पर
पूर्वी या पश्चिमी?
अलग अलग है दोनों
एक किनारे हैं गर्म हवाएँ
तो दूसरी ओर ठंडी
एक तरफ है ज्वालामुखी
तो दूसरी तरफ बर्फ के पहाड़
किन जंगलों, पहाड़ों, तराई
घाटी, खाई में?
कहाँ?
गुम हुई प्रेमिकाएँ
कहीं नहीं छोड़ती कोई चिह्न
ना किताबों के वर्क पर
न हाशिए पर
न शब्दों में,
न पंक्तियों के बीच
ख़ाली जगहों में।
किसी ने नहीं देखी इनकी सूरत,
न सीरत,
किसी ने नहीं सुना
इनका रोना कैसे संभव हुआ ये
जबकि दूसरी पृथ्वी नहीं है
जहाँ बस जाने का अंदेशा हो
वो अपने साथ
क्या-क्या लेकर विलुप्त हो
किसके महापाप!
किसका महापुरुषत्व!
बुधवार, 22 मार्च 2023
इतनी नफ़रत कहाँ से लाते हो?
सोमवार, 18 मार्च 2019
फरवरी की बारिश
टीन की छतों पर गिरता बारिश का पानी
बढ़ती जाती है जैसे-जैसे ठंडक
सिहरन होती है शरीर में
कान के पीछे झुरझुरी
थरथराते हाथों से हटता है परदा
भीग गए होंगे बिस्तर फुटपाथ पर सोने वालों के
मेरी आँखों के कोनों पर
अटक जाती हैं दो बूँदें
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सुना है मंगल ग्रह पर हुआ करता था पानी और जीवन. पानी खत्म हुआ तो जीवन भी खत्म.
रोना कमजोरी की निशानी नही, जीवन का संकेत है
