शनिवार, 14 फ़रवरी 2009

प्यार क्या है (वैलेंटाइन डे पर विशेष )

(वैलेंटाइन डे मनाना चाहिए या नहीं मैं इस विवाद में नहीं पडूँगी . मुझे जो त्यौहार अच्छा लगता है मना लेती हूँ .ये तो रही मेरी बात .समाज के लिहाज से इस बहाने प्रेम जैसे वर्जित विषय पर हमारे यहाँ चर्चा हो जाती है ,ये एक सकारात्मक बात है .इसलिए मैं भी एक कविता लिख रही हूँ ,जो प्रेमियों को पसंद आएगी .कविता लम्बी है ,अतः अंशतः ही छाप रही हूँ।... ... ... ... ... ... ... एक भड़कता शोला /एक ठंडी आग /एक दर्दीली खुशी /एक खुशनुमा दर्द /फूलों की खुशबू /काँटों का हार /क्या यही है प्यार ?/...एक चुभती नज़र /एक मीठी मुस्कान /एक भोली सी हँसी /एक आँसुओं का उफान /शाम का धुंधलका /सुबह का ख़ुमार /क्या यही है प्यार? /... कभी रंगीनियों की महफ़िल /और महफ़िल में तन्हाई /कभी मिलना किसी का /और मिलन में जुदाई /विरह का पतझड़ /मिलन की बहार /क्या यही है प्यार ?... कभी बातें ही बातें /कभी चुप बैठे रहना /कभी सब कुछ कह जाना /कभी कुछ भी न कहना /उनकी एक झलक को /घंटों इंतज़ार /क्या यही है प्यार ?... कभी ख़ुद से बातें करना /कभी हँसना गुनगुनाना /वो बात-बात पर रूठना /और देर तक मनाना /इज़हार इनकार /इक़रार तक़रार/क्या यही है प्यार ?... वो छुप-छुपकर देखना /दिख जाने पर छुपना /वो उनकी बेरुखी पर /बेवज़ह रोना-सिसकना /चल देना नाराज़ होकर /फिर मुड़ना इक बार /क्या यही है प्यार ?...एक अनजानी मंज़िल/एक अनचीन्ही राह /साथ चलने की हसरत /पास आने की चाह /वो बारिश का मौसम /और पेड़ों की आड़ /क्या यही है प्यार ?... वो नदी का किनारा /उसे देखना एकटक /हाथों में हाथ लेकर /टहलना दूर तक /सर्दी की धुप /गरमी की छाँव /क्या यही है प्यार ?... ... ... ... ... ... ... ... ... कभी लड़ने का साहस /कभी रुसवाई का डर /कभी घर में हंगामा /कभी दुनिया का कहर /दो मासूम दिल /और दुश्मन हज़ार /क्या यही है प्यार ?

5 टिप्‍पणियां:

  1. वाह!! बहुत उम्दा ..क्या यही है प्यार? बहुत बेहतरीन परिभाषायें दे डाली. बधाई.

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  2. बहुत सारे सामयिक अर्थ जुड़े है इसमे प्यार के. आभार.

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  3. आपके चिट्ठे का पता आकर्षक लगा मुझे।इसे चोखेरबाली पर शामिल कर रही हूँ,उम्मीद है फेमिनिस्ट कविताओं का यह तेवर असर करेगा।

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  4. बहुत कुछ कहने के बाद भी जो अनकहा सा रह जाय बार बार वह है प्यार !
    वाह बहुत उम्दा ! सोच, अनुभूति और अभिव्यक्ति !

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