शुक्रवार, 16 जनवरी 2009

सभ्य समाज

सरे राह होता है
एक लड़की के साथ बलात्कार
कहते हैं समाज के ठेकेदार
ग़लती लड़की की है
कि वो रात में क्यों निकली
घर से बाहर।
आपको अचरज हुआ ?
क्या भूल गए? ये कोई नई बात तो नहीं
हमारा समाज एक सभ्य समाज है
यहाँ अपहरण रावण करता है
अग्निपरीक्षा देती है सीता
यहाँ जुए में पांडव हारते हैं
और चीर हरण होता है द्रौपदी का।  .

1 टिप्पणी:

  1. in kavitaoN par koi "chaltaau" tippni karne ka man nahiN hota. koi achchhi cheez lekar lautuNga.
    filhal itna zarur kahna chahuNga aaj sahitya ko aisi hi bhasha ki zarurat hai ki jatil vishyoN aur bariq chaalakioN ko aam aadmi bhi samajh sake.
    purana sahitya is mamle meN vyarth siddha hua hai.

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