शुक्रवार, 16 जनवरी 2009

मन विद्रोही -2

माँ कहती थी /सूनी राहों पर मत निकलो /क़दम क़दम पर यहाँ भेड़िये/ घात लगा बैठे रहते हैं ./मैं चुप रहती /और सोचती /ये दुनिया है या है जंगल ./अब माँ नहीं जो मुझको रोके /कोई नहीं जो मुझको टोके ,/मैं स्वंतत्र हूँ ,अपनी मालिक /किसी राह भी जा सकती हूँ ,/लेकिन अब भी माँ की बातें /हर दिन याद किया करती हूँ /सूनी राहों से डरती हूँ /और अंधेरे से बचती हूँ ./कंचे खेलना ,पतंग उड़ाना/अब लगती है बातें बीती /जाने किस कोने जा बैठा /मेरा अड़ियल मन विद्रोही .

13 टिप्‍पणियां:

  1. शायद वह ‘अड़ियल मन विद्रोही’ अब सयाना हो गया है।
    कुछ ज्यादा समझदार... और इसीलिए कुछ डरना सीख गया है...।

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  2. क्या अब भी लगता है कि काश माँ रोकती-टोकती?
    माँ जब आंसू आते थे आप याद आती थी
    आज आप याद आती हो और आंसु आते हैं।

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  3. lage raho India.
    Likte rahe aap ka awagat hai.
    www.sanghsadhna.blogspot.com

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  4. jis tarh naye saal par puran kailender utar kar naya kailender laga dete hai usi tarh ye aasha bhi rakhani chahiye ki samay ke saath sabhi kuch badal jayega.Duniya main koi bhi chij sthai nahi hoti hai jaroorat hai use badalne ke liye ek imandar koshish ki.

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  5. हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका हार्दिक स्वागत है. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाऐं.

    एक निवेदन: कृप्या वर्ड वेरीफिकेशन हटा लें तो टिप्पणी देने में सहूलियत होगी.

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  6. सुन्दर रचना. मां का रोकना-टोकना कितना सारगर्भित था, बाद में ही समझ में आता है.
    धन्यवाद.

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  7. बहुत सुंदर...आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है.....आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे .....हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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  8. आपका ब्लॉग देखा, बहुत अच्छा लगा. मेरी कामना है कि आपके शब्द नयी ऊर्जा, नए अर्थ और गहन संप्रेषण के वाहक बन कर जन-सरोकारों का सार्थक व समर्थ चित्रण करें ........
    कभी समय निकाल कर मेरे ब्लॉग पर पधारने का कष्ट करें-
    http:www.hindi-nikash.blogspot.com

    शुभकामनाओं के साथ-
    आनंदकृष्ण, जबलपुर

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  9. hindi blog jagt men aapka swagat hai .

    maan ke sandarbh men prastut rachanaa uski sambhal ko darshati hai

    badhai

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  10. हिंदी लिखाड़ियों की दुनिया में आपका स्वागत। खूब लिखे ।अच्छा लिखे। हजारों शुभकामनांए।

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  11. बहुत अच्छा! सुंदर लेखन के साथ चिट्ठों की दुनिया में स्वागत है। चिट्ठाजगत से जुडऩे के बाद मैंने खुद को हमेशा खुद को जिज्ञासु पाया। चिट्ठा के उन दोस्तों से मिलने की तलब, जो अपने लेखन से रू-ब-रू होने का मौका दे रहे हैं एक तलब का एहसास हुआ। आप भी इस विशाल सागर शब्दों के खूब गोते लगाएं। मिलते रहेंगे। शुभकामनाएं।

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  12. बड़ी संवेदनशीलता के साथ आपने कविता में भावों और विचारों को अभिव्यक्त किया है । अच्छा लिखा है आपने । अभिव्यक्ति बडी प्रखर है । आगे भी इसी रचनात्मक ऊर्जा से साक्षात्कार होता रहेगा । मैन अपने ब्लाग पर एक लेख लिखा है- आत्मविश्वास के सहारे जीतें जिंदगी की जंग । समय हो तो पढ़ें और प्रतिक्रिया भी दें-

    httP://www.ashokvichar.blogspot.com

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