गुरुवार, 20 अगस्त 2026

पल भर का साथ

कभी उस साथी को हमसफ़र मत समझना जिसका घोंसला कहीं और हो 

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दूर देश दाने की तलाश में 
भटक रहा
थका हारा पक्षी
 
सुस्ता लेता है
 
किसी पेड़ की डाल पर यदि छाँव देख
तो वह पेड़
, उस पक्षी का घर नहीं हो जाता

पक्षी जाएगा वहीं पर 
कई दिनों की मेहनत से बनाए हुए घोंसले में जहाँ
भूख से राह देख रहे कुछ नन्हे चूज़े
 
चोंच फैलाए बैठे हैं घण्टों से

पेड़ का गुमान तोड़ने को बस इतनी ही बात काफ़ी है कि वह खुद उड़कर 
जा नहीं सकता
उस पक्षी के पीछे  
जिसके एक पल ठहर जाने को वह
जीवन भर का साथ समझ बैठा था।
 

-मुक्ति