मंगलवार, 9 फ़रवरी 2010

अनछुई कली

जनवरी में मेरे इस ब्लॉग को एक वर्ष पूरे हो गये हैं. मेरे लिये सबसे अच्छी बात यह रही कि इस बीच बहुत से सुधीजनों से परिचय हुआ, अनेक लोगों से प्यार और स्नेह मिला. मुझे लगा जैसे ब्लॉगजगत मेरा एक परिवार बन गया हो, हालांकि अभी मुझे कम लोग ही जानते हैं, पर फिर भी, जो जानते हैं, अच्छी तरह से जानते हैं.
मैंने यह ब्लॉग आरंभ किया था अपनी उन भावनाओं को व्यक्त करने के लिये, जो मैंने एक लड़की होने के नाते अनुभव की हैं. इसलिये मेरी इन कविताओं में साहित्य से कहीं अधिक सामाजिक सरोकार की प्रधानता है, शिल्प से अधिक भाव की प्रमुखता है.
आज मैं एक साल पहले पोस्ट की गयी अपनी पहली कविता को दोबारा पोस्ट कर रही हूँ.

तुमने... मेरी ठोड़ी को
हौले से उठाकर कहा,
"अनछुई कली हो तुम! "
मैं चौंकी,
ये झूठ तो नहीं...
नहीं, तन और मन से
पवित्र हूँ मैं,
मैं कली हूँ अनछुई
और तुम भँवरे,
मैं स्थिर तुम चंचल,
प्रेम की राह में दोनों बराबर,
तो मैं ही अनछुई क्यों रहूँ ?
भला बताओ...
तुम्हें अनछुआ भँवरा क्यों न कहूँ ?

15 टिप्‍पणियां:

  1. Bahut sundar rachana hai ye muktiji...dobara post ki accha kiya mujhe is rachana ko asani se padana mila! bahut accha likhati hai aap1 shubhkamnae..
    http://kavyamanjusha.blogspot.com/

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  2. सही है!!


    एक साल होने पर बहुत बधाई और शुभकामनाएँ.

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  3. ब्लोग जगत में एक साल पुर्ण करने पर आपको हार्दिक शुभकामनायें

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  4. आराधना जी, आदाब
    कविताएं भावनाओं का दर्पण होती हैं.
    जिन्हें बहुत सुन्दर शब्दों में प्रस्तुत किया है आपने.
    ब्लाग जगत में एक वर्ष पूर्ण होने की मुबारकबाद के साथ...
    शाहिद मिर्ज़ा शाहिद

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  5. मुबारक हो....आप एक साल की हो गईं...मेरा मतलब है आपका ब्ल़ॉग.....सालगिरह की पार्टी कब दे रही हैं......

    हां पहली कविता ही बढ़िया है..

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  6. अब तक की कविताओं में दुनिया की आधी आबादी का दर्द जो आपने बयान किया है महज एक साल में वो काबिले तारिफ है...

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  7. एक साल में जो आपने पहचान बनाई है वह शानदार है.
    बधाई

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  8. अच्छी रचना. ब्लॉग के एक वर्ष पूरा होने पर बधाई !! ब्लॉग पसंद आया !!!

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  9. ब्लॉग का एक साल पूरा करने के लिए बहुत बहुत बधाई..... सही कहा आपने.... ब्लॉग जगत एक परिवार बन चुका है.... और इस परिवार में सब पारिवारिक सदस्य के रूप में अपनी-अपनी भूमिका बखूबी निभा रहे हैं.....

    कविता बहुत अच्छी लगी....

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  10. very few bloggers blog with mission and you are one of them . you have used the plat form for a purpose which is well defined . keep the good work going

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  11. Repeating Rachana Ji, "keep the good work going"

    प्रारंभ ही कथा कह रहा है यात्रा की ! महसूस लिया था उसी वक्त !

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  12. एक वर्ष पूर्ण होने की बधाई !
    जारी रखियेगा यह काफिला जिसमें सब हैं --- '' .... लोग साथ आते गए
    और कारवां बढ़ता गया ''
    .
    क्या विधान है इस पंक्ति का --- '' तुम्हें अनछुआ भँवरा क्यों न कहूँ ? ''
    इसमें प्रश्न और उत्तर दोनों है ! आभार !

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  13. इन्ही पोस्टों ने तुडवा दीन्हा मेरा मंगल ब्लॉग व्रत .....

    सहसा ही याद हो आयी -अनाघ्रातम पुष्पं ........अनाबिद्धम रत्नम ..नवमधुमनास्वादितरसम ...न जाने भोक्तारं......
    स्वास्थ्य का ध्यान रखें ......आप चंद उन प्रतिभाओं में से हैं जिन्हें मैं यहाँ सदैव देखना चाहूंगा .

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  14. बहुत सुन्दर! अनछुई कली, अनछुआ भौंरा-- एकदम नये से बिम्ब!

    साल पूरा होने की बधाई! शुभकामनायें!

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