सोमवार, 7 फ़रवरी 2011

मरीचिका


खुद के बनाए सपनों के महल
कुछ खुशफहमियाँ 
कुछ जानबूझकर अनदेखा करना
आँखें बंदकर चलना
अनचाही मंजिल पर पहुंचकर पछताना,
मरीचिका है ये, मृग मरीचिका
प्रेम, भावनाएँ, भली बातें
दुनिया इतनी भली नहीं, जितनी लगती है
तुम उतनी सुखी नहीं, जितनी दिखती हो
क्यों करती हो ये नाटक?
भला इसी में है कि इस भ्रमजाल से निकल आओ,
दुनिया को अपनी नज़र से देखने वाली औरत
इस ढोंग से बाज आओ
वरना एक दिन पछताओगी
सुखी जीवन का नाटक करते-करते ऊब जाओगी
और निकलने की राह भी ना पाओगी.

27 टिप्‍पणियां:

  1. दुनिया इतनी भली नहीं, जितनी लगती है
    भला इसी में है कि इस भ्रमजाल से निकल आओ
    वरना एक दिन पछताओगी... व्यवहारिक रचना जो पछताने के उपरांत लिखी गई है...
    जाने कई सालों तक व्यक्ति भ्रम में ही जीता है

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  2. दुनिया इतनी भली नहीं, जितनी लगती है-
    यह सच है मगर यह भी सच है -
    तुझे एतबारों-य़कीन नहीं , नहीं दुनिया इतनी बुरी नहीं ,
    ना मलाल कर , मेरे साथ आ, जो गुजर गया सो गुजर गया ।
    (बशीर बद्र )

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  3. The entire GAZHAL -
    Har Waqt Ranj-O-Malaal Kya, Jo Gujar Gaya So Gujar Gaya
    Use Yaad Karke Na Dil Dukha, Jo Gujar Gaya So Gujar Gaya

    Na Gila Kiya, Na Khafa Huye, Yoon Hi Raaste Mein Khuda Huye
    Na Tu Bewafa Na Main Bewafa, Jo Gujar Gaya So Gujar Gaya

    Voh Ghazal Ki Ek Keetab Tha, Voh Gullon Mein Ek Gulab Tha
    Zara Der Ka Koi Khwab Tha, Jo Gujar Gaya So Gujar Gaya

    Mujhe Patjhadon Ki Kahaniyan Na Suna-Suna Ke Udas Kar
    Tu Khizaan Ka Phool Hai Muskura, Jo Gujar Gaya So Gujar Gaya

    Ye Safar Bhi Kitna Taveel (Lamba) Hai Yahan Waqat Kitna Kaleel Hai
    Kahan Laut Kar Koi Aayega Jo Gujar Gaya So Gujar Gaya

    Voh Wafayein Thi Ke Jafayein Thi, N Ye Soch Kiski Khatayein Thi
    Voh Tera Hai Usko Gale Laga Jo Gujar Gaya So Gujar Gaya

    Tujhe Aitbar-O-Yakeen Nahi, Nahi Duniya Itni Buri Nahi
    N Malaal Kar Mere Saath Aa Jo Gujar Gaya So Gujar Gaya

    - Bashir Badr

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  4. duniya us orat ka sach nhi sun payegi...use to es bharm me dubi hui orat hi chahiye...mjbur hai hm ek jhuthi jindgi jine ke liye..
    achi kavita..

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  5. असल में तो क्‍या औरत,क्‍या आदमी। सब इसी भ्रमजाल में जीते हैं।

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  6. इस ढोंग से बाज आओ
    वरना एक दिन पछताओगी
    सुखी जीवन का नाटक करते-करते ऊब जाओगी
    और निकलने की राह भी ना पाओगी..
    Akrosh jhalak raha hai..
    vyavharik rachna.

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  7. बेहद सटीक और यथार्थपरक अभिव्यक्ति. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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  8. ये सिर्फ औरत की बात नहीं है..सब की बात है ..हर व्यक्ति जीवन के अलग अलग मोड पर खुशी का यह दिखावा करता है ...

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  9. आपको वसंत पंचमी की ढेरों शुभकामनाएं!
    सादर,
    डोरोथी.

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  10. बहुत अच्छा लिखा है आपने आराधना जी!!

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  11. अरविन्द जी ने जो गज़ल दिया वो भी कमाल का है :)

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  12. समझाने से समझ में आ जाय तो भ्रम कैसा! इसका तिलस्म तो भोगने पर ही टूटता है।
    मृत्यु निश्चित है मगर आदमी जीने के लिए रोज मरता है।

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  13. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति!

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  14. आराधना जी...नारीतत्व पर भी अच्छा likha आपने इस क्षेत्र में भी....बहुत ही अच्छा प्रयास किया आपने.........मुबारक इस रचना और इसके खूबसूरत अंदाज़ के लिए....रेक्टर कथूरिया

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  15. कष्ट को बांटने से समय आसान लगेगा मुक्ति !

    ब्लॉग संरचना और क्लासिक खूबसूरती बहुत पसंद आई ...शुभकामनायें !

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  16. ये दुनिया उतनी खराब भी नहीँ हुई है
    जितना सोचती हैँ आप

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  17. You have completed your PG in 2001. But started research in 2009. Its a very very long gap. However you research topic is untraditional and i am sure your project must reveal some amazing facts about women which are uncovered for the very long years. I really feel respect for you for you . Thanks

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  18. @shiv, अगर आपको ये पता है कि मैंने एम्.ए. २००१ में किया था, तो ये भी पता होना चाहिए कि मेरी डी.फिल. पूरी हो चुकी है और मैं जे.एन.यू. में पोस्ट डॉक्टोरल फेलो हूँ.

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  19. दुनिया इतनी भली नहीं, जितनी लगती है..

    सही कहा है पर दुनिया हमेशा इतनी बुरी भी नहीं ...भ्रम जाल से निकल कर दुनिया की अच्छाईयों को ढूंढो तो वे भी यहीं मिल जायेंगी..सुन्दर भावपूर्ण रचना

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  20. बहुत सटीक विश्लेषण ..काश वह इस चेतावनी के स्वर को सुन पाए....

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  21. बहुत सटीक विश्लेषण ..काश वह इस चेतावनी के स्वर को सुन पाए....

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  22. बहुत सटीक विश्लेषण ..काश वह इस चेतावनी के स्वर को सुन पाए....

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  23. अगर हकीकत दि‍ख गई है तो नयी राह भी सूझ जायेगी।

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  24. Bhram ki sthiti agar sukhkari ho to bhram mein rahne me fark nahi...bhram aur sapne mein antar kitna?

    Yattharth waise bhi kashkaari hota hai...

    acchi abhivyakti hai aapki...

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  25. दिक्कत तो ये भी है कि औरतें पछताना जानती नहीं, पछताना चाहती नहीं, वो मानती हैं ऐसा ही होता है।
    बहुत बढ़िया बात और ये सुखी जीवन का नाटक ही दुखी बनाता है।

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