मंगलवार, 17 मार्च 2009

धूल

धूल साथी है
मेहनतकश मजदूरों की, गरीबों की,
बड़े घरों की शानदार बैठकों में
धूल नहीं होती ,
उसे रगड़-रगड़कर
साफ़ कर दिया जाता है,

धूल में होते हैं
अनेक रोगाणु -कीटाणु,
जैसे शहर की झोपड़पट्टियों में पलते
कीड़ों जैसे गंदे-बिलबिलाते लोग
नाक बहाते, थूक गिराते बच्चे,


झोपड़पट्टियाँ...
शानदार शहरों की धूल हैं
इन्हें रगड़-रगड़कर
साफ़ कर देना चाहिए ।

शुक्रवार, 13 मार्च 2009

लड़कियाँ और कुकुरमुत्ते

लड़कियाँ गाँधीजी के तीन बंदरों का
जीवंत प्रतिरूप हैं
न देखती हैं ,न सुनती हैं ,न कहती हैं
लड़कियाँ पाली नहीं जाती
कूड़े के ढेर पर पलने वाले कुकुरमुत्तों की तरह
ख़ुद ही पलती और बढती रहती हैं।

लड़कियाँ बहनें ,बेटियाँ ,पत्नी और माँ हैं
लड़कियाँ ख़ुद कहाँ हैं?

कोई नहीं सोचता
कि लड़कियाँ सोच सकती हैं
इसलिए उनकी कोई पसंद, कोई ख़्वाहिश नहीं होती।

लड़कियों को बताया जाता है
कि वे सोचने के लिए नहीं करने के लिए हैं
और इसीलिए
लड़कियाँ करती रहती हैं
झाडू ,पोछा ,बर्तन,खाना
जो भी उनसे कहा जाता है।
शादी से पहले पिता के घर
शादी के बाद पति के यहाँ बस करती ही रहती हैं,
न देखती हैं ,न सुनती हैं ,न कहती हैं
कूड़े के ढेर पर उगने वाले कुकुरमुत्तों की तरह
उगती ,पलती ,बढती और मरती रहती हैं। ... ...

मंगलवार, 24 फ़रवरी 2009

तुम आए मेरे जीवन में

तुम आए मेरे जीवन में ऐसे ...
सालों से सूखे ठूंठ में सहसा
उग आयीं हो नयी कोंपलें जैसे...
तुम आए मेरे जीवन ऐसे
महुए की मदिर गंध फागुन में
फैल गयी हो वन-उपवन में जैसे...
तुम आए मेरे जीवन में ऐसे
जलती -तपती धरती पर बरसी हों
घिर-घिर के घनघोर घटाएं जैसे...
तुम आए मेरे जीवन में ऐसे
थककर बैठे क्लांत पथिक के सम्मुख
तीर्थ स्वयं चलकर आया हो जैसे

शनिवार, 21 फ़रवरी 2009

सखी

मेरी सखी
हँसती-गुनगुनाती रहती
सारा दिन
सपने सजाती
अपनी शादी के
मुझसे करती
ढेरों बातें
शादी के बाद
उसकी हँसी खो गई
उसकी चूडियों की खनखनाहट में
उसका गुनगुनाना
पायल की झंकार में मिल गया
अब वो मिलती है मुझे
सिर्फ़ मेरे सपने में
हाथ बढ़ाकर पकड़ना चाहती हूँ उसे
हाथ में आती है
उसकी पायल ,चूड़ी ,मंगलसूत्र
वो नहीं मिलती
जाने कहाँ कहीं खो गई
एक बड़े घर की बहू बनकर रह गई मेरी सखी
शादी के बाद
औरतें सखी नहीं होती
शादी के बाद
औरतों की सखियाँ
कहीं खो जाती हैं ।

बुधवार, 18 फ़रवरी 2009

एक औरत और समाज, परिवार वगैरह

एक औरत...
कैसे देखे सपना
आसमान छूने का
जबकि उसकी पूरी ज़िंदगी
गुज़र जाती है
तलाशते हुए अपने हिस्से की ज़मीन
एक औरत...
कैसे लड़े समाज के लिए
जबकि उसको प्रतिदिन लड़ना पड़ता है
ख़ुद समाज से
एक औरत ...
क्या कर सकती है
बेघरों के लिए
जबकि ख़ुद सारा जीवन
ढूँढती रहती है अपना घर
एक औरत ...कैसे सोचे संसार के बारे में
जबकि उसका परिवार ही बन जाता है
उसका संसार ... ...

शनिवार, 14 फ़रवरी 2009

प्यार क्या है (वैलेंटाइन डे पर विशेष )

(वैलेंटाइन डे मनाना चाहिए या नहीं मैं इस विवाद में नहीं पडूँगी . मुझे जो त्यौहार अच्छा लगता है मना लेती हूँ .ये तो रही मेरी बात .समाज के लिहाज से इस बहाने प्रेम जैसे वर्जित विषय पर हमारे यहाँ चर्चा हो जाती है ,ये एक सकारात्मक बात है .इसलिए मैं भी एक कविता लिख रही हूँ ,जो प्रेमियों को पसंद आएगी .कविता लम्बी है ,अतः अंशतः ही छाप रही हूँ।... ... ... ... ... ... ... एक भड़कता शोला /एक ठंडी आग /एक दर्दीली खुशी /एक खुशनुमा दर्द /फूलों की खुशबू /काँटों का हार /क्या यही है प्यार ?/...एक चुभती नज़र /एक मीठी मुस्कान /एक भोली सी हँसी /एक आँसुओं का उफान /शाम का धुंधलका /सुबह का ख़ुमार /क्या यही है प्यार? /... कभी रंगीनियों की महफ़िल /और महफ़िल में तन्हाई /कभी मिलना किसी का /और मिलन में जुदाई /विरह का पतझड़ /मिलन की बहार /क्या यही है प्यार ?... कभी बातें ही बातें /कभी चुप बैठे रहना /कभी सब कुछ कह जाना /कभी कुछ भी न कहना /उनकी एक झलक को /घंटों इंतज़ार /क्या यही है प्यार ?... कभी ख़ुद से बातें करना /कभी हँसना गुनगुनाना /वो बात-बात पर रूठना /और देर तक मनाना /इज़हार इनकार /इक़रार तक़रार/क्या यही है प्यार ?... वो छुप-छुपकर देखना /दिख जाने पर छुपना /वो उनकी बेरुखी पर /बेवज़ह रोना-सिसकना /चल देना नाराज़ होकर /फिर मुड़ना इक बार /क्या यही है प्यार ?...एक अनजानी मंज़िल/एक अनचीन्ही राह /साथ चलने की हसरत /पास आने की चाह /वो बारिश का मौसम /और पेड़ों की आड़ /क्या यही है प्यार ?... वो नदी का किनारा /उसे देखना एकटक /हाथों में हाथ लेकर /टहलना दूर तक /सर्दी की धुप /गरमी की छाँव /क्या यही है प्यार ?... ... ... ... ... ... ... ... ... कभी लड़ने का साहस /कभी रुसवाई का डर /कभी घर में हंगामा /कभी दुनिया का कहर /दो मासूम दिल /और दुश्मन हज़ार /क्या यही है प्यार ?

गुरुवार, 12 फ़रवरी 2009

प्रेम और पूजा

प्रेम किया है मैंने /पूजा नहीं /जो अपने आपको /तुम्हारे कदमों में /गिरा दूँगी /साथ रहोगे /तो साथ दूँगी /अपनी मौत तक /चले जाओगे छोड़कर /तो तुम्हारा नाम /दिल की स्लेट से /मिटा दूँगी ।